४३२ ॥ श्री वंका जी ॥ चौपाई:- वंका कहै भजौ भगवाना। नित प्रति मेहनत करके खाना।१। अन्त समय हरि धाम सिधरिये। जन्म मरन में तब नहि परिये।२।